अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल को यूरोप से लगातार ठोकरें मिल रही हैं। डावोस में स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन ने इसे ठुकरा दिया, फ्रांस व नॉर्वे की तर्ज पर। मौजूदा ढांचे में शामिल न होने का स्पष्ट संकेत दिया।
नॉर्वे के एंड्रियास क्राविक ने कहा कि यूएन के मूलभूत सिद्धांतों को चोट पहुंचाने वाली योजना से दूर रहेंगे। मैक्रों ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में इसे सुरक्षा परिषद का मुकाबला न बताया। ड्राफ्ट चार्टर से साफ है कि ट्रंप की उम्र भर अध्यक्षता रहेगी, गाजा से शुरूआत कर अन्य विवादों तक फैलाव।
पुतिन व लुकाशेंको को न्यौता ब्रिटेन समेत यूरोप में विवादास्पद। इजरायल के नेतन्याहू ने स्वीकार किया, एक्स पर घोषणा की। मगर पहले तुर्की के फिदान को जगह पर आपत्ति जताई, रुबियो से चर्चा का प्लान।
अर्जेंटीना से वियतनाम तक कई देश तैयार। गाजा के दूसरे फेज में एनसीएजी पुनर्वास व फंडिंग देखेगा, बोर्ड व एग्जीक्यूटिव ग्रुप सहयोग करेंगे।
राजनयिक चिंतित कि यूएन प्रभावित होगा। स्वीडन का स्टैंड ट्रंप की समानांतर शांति ताकत को चुनौती। गाजा संकट के समाधान की राह में ये विभाजन बाधा बनेगा।