व्यस्त दिनचर्या में स्नान केवल गंदगी उतारने तक सीमित हो गया है, लेकिन आयुर्वेद इसे चिकित्सा का माध्यम बताता है। यह न केवल शरीर साफ करता बल्कि मन को शांति और ऊर्जा प्रदान करता है। रोज स्नान से सुस्ती भागती है, पाचन मजबूत होता है, नकारात्मकता कम होती है।
शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में स्नान की बड़ी भूमिका है। यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता और आग्नि संतुलित करता है। पानी गिरने पर रक्तप्रवाह तेज हो जाता है।
शोध बताते हैं कि स्नान से तनाव हार्मोन घटता है, खुशी के हार्मोन बढ़ते हैं। अनिद्रा दूर करने के लिए गर्म पानी से स्नान या पैर भिगोना उत्तम।
सही स्नान के लिए आयुर्वेद तीन विधियां सुझाता है। सबसे पहले अभ्यंग से मालिश, फिर उबटन से सफाई जो मृत कोशिकाएं हटाता है, अंत में मंत्रोच्चार से सकारात्मकता।
इन नियमों से स्नान को परिवर्तित करें। आयुर्वेदिक तरीके से स्वस्थ जीवन जिएं।