इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2025 का ऐलान हो गया। मोजाम्बिक की प्रसिद्ध समाजसेवी ग्रासा माशेल को अंतरराष्ट्रीय जूरी ने चुना है। शिवशंकर मेनन की अगुवाई में बने इस फैसले ने उनके संघर्षों को सम्मान दिया।
मानवाधिकार, आत्मनिर्भरता और कमजोर वर्गों के लिए उनका जीवन उदाहरण है। समानता और सम्मान वाले समाज की वे पैरोकार रहीं।
1945 में ग्रामीण मोजाम्बिक में जन्मीं ग्रासा ने लिस्बन में पढ़ाई की। 1973 में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ीं। आजादी के बाद शिक्षा मंत्रालय संभाला, जहां दाखिले में क्रांति आई।
वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट से युद्ध प्रभावित बच्चों की दशा सुधरी। कई पुरस्कार हासिल किए।
अनेक संस्थाओं से जुड़ीं—द एल्डर्स, गर्ल्स नॉट ब्राइड्स, मंडेला इंस्टीट्यूट। ट्रस्ट के जरिए महिलाओं का आर्थिक उत्थान, बच्चों का विकास। डब्ल्यूएचओ का सर्वोच्च सम्मान 2018 में।
जूरी ने उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय प्रयासों की तारीफ की। यह पुरस्कार उनके योगदान का प्रमाण है।