बांग्लादेश के ढाका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एशिया पैसिफिक ने ईशनिंदा के इल्जाम में दो प्रोफेसरों को सड़क पर डाल दिया। इसकी जमकर निंदा पेरिस की मानवाधिकार संस्था जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने की है। संगठन ने इसे दक्षिण एशिया में शैक्षणिक अधिकारों पर गहरा प्रहार करार दिया।
जनवरी 18 को डिपार्टमेंट ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज से असिस्टेंट प्रोफेसर लायेका बशीर और एसोसिएट प्रोफेसर एएसएम मोहसिन (जो डिपार्टमेंट हेड थे) को बर्खास्त कर दिया गया। जेएमबीएफ के अनुसार, उग्र छात्रों की हंगामे और संगठित दबाव में बिना जांच पूरी किए और बचाव का अवसर दिए यह कार्रवाई हुई।
संस्था ने जोर देकर कहा कि यह कदम देश के संवैधानिक प्रावधानों, वैश्विक मानवाधिकार मानदंडों और न्यायिक मूल्यों की अवहेलना है। जांच टीम आरोपों पर विचार कर रही थी, तब भी जल्दबाजी में फैसला सुना दिया गया।
प्रसिद्ध फ्रांसीसी कार्यकर्ता और जेएमबीएफ सलाहकार रॉबर्ट जॉन पॉल साइमन ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट को तोड़-मरोड़कर इस्लाम-विरोधी बताना, हिंसा भड़काना और प्रशासनिक हस्तक्षेप से बर्खास्तगी करवाना घातक उदाहरण है। प्रशासन ने कर्तव्य भुलाकर उन्मादी ताकतों का साथ दिया।
यह सिर्फ व्यक्तिगत अन्याय नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली और बोलने की आजादी के लिए चुनौती है। भविष्य में वैज्ञानिक चिंतन और विचार-विमर्श दब सकता है।
जेएमबीएफ ने बर्खास्तगी रद्द करने, निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच और प्रोफेसरों की हिफाजत की अपील की। मामला बांग्लादेशी शिक्षा में बढ़ते धार्मिक दबाव को रेखांकित करता है।