उत्तराखंड के धार्मिक गलियारों में बागेश्वर धाम sarcों के धीरेंद्र शास्त्री के तिरंगे वाले बयान को लेकर हलचल तेज है। बांदा के एक कार्यक्रम में शास्त्री ने कहा था कि तिरंगे में चांद आते ही शर्मा-वर्मा जैसे नाम मिट जाएंगे, इसलिए पहचान धर्म से होनी चाहिए। इस पर संतों ने प्रतिक्रिया दी है।
ऋषिकेश के जगन्नाथ आश्रम के महंत लोकेश दास ने कहा, ‘जब हम बंटेंगे, तब कटेंगे। राजनीति ने जातियों में बांट दिया, लेकिन मुसलमानों में ऐसी फूट नहीं। काशी विवाद में उनकी तत्परता देखिए, जबकि हमारे शंकराचार्य को अपमानित करने पर चुप्पी।’ उन्होंने सभी हिंदुओं से एकजुट होने का आह्वान किया।
महंत ने ब्राह्मण नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए, ‘वोट के लिए जाति का ढोंग करते हैं, लेकिन संकट में गायब। जातिवाद से फायदा शत्रुओं को होगा।’ बड़े अखाड़ा के महामंडलेश्वर हरि चेतानंद ने बांग्लादेश की घटनाओं से जोड़ते हुए कहा कि शास्त्री का बयान विचारपूर्ण है।
संतों का यह रुख जाति-आधारित राजनीति को चुनौती दे रहा है। हिंदू एकता ही तिरंगे और सनातन की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, वरना खतरा मंडरा रहा है।