बांग्लादेश में पितृसत्तात्मक राजनीति का बोलबाला बरकरार है। 12 फरवरी के चुनावों के लिए दाखिल 2568 नामांकनों में महिलाएं सिर्फ 109 हैं – कुल का 4.2 फीसदी। प्रथम आलो में सलीम जहां ने मीडिया आंकड़ों से इस कमी को रेखांकित किया।
72 को पार्टियों ने समर्थन दिया, 37 स्वतंत्र। 50 दलों में 30 ने महिलाओं को पूरी तरह खारिज किया। आबादी के आधे हिस्से को अनदेखा करना दुर्भाग्यपूर्ण।
बीएनपी-बीएसपी आगे रहीं 10-10 टिकटों के साथ, मगर बीएनपी का 3 फीसदी प्रयास निराश करता है। जमात ने 279 में एक नहीं। 5% का लक्ष्य चूका।
महिलाएं राजनीति से दूर, प्रचार-रैलियों में अनुपस्थित। सांस्कृतिक बाधाएं और शारीरिक ताकत वाली राजनीति रोक रही। सुधार जरूरी है ताकि लोकतंत्र सशक्त बने।