आईआईटी रुड़की ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यहां विकसित नेक्स्ट-जेनरेशन एंटीबॉडी डिस्कवरी प्लेटफॉर्म कैंसर, संक्रमणकारी बीमारियों, ऑटोइम्यून समस्याओं और उभरते रोगाणुओं के खिलाफ हथियार बनेगा। यह उच्च गुणवत्ता वाली स्थिर एंटीबॉडीज की शीघ्र पहचान करेगा।
हाई-डाइवर्सिटी नैनोबॉडी लाइब्रेरी इसकी ताकत है, जो मजबूत एफिनिटी के साथ लक्ष्यों को निशाना बनाती है। आपात स्थितियों में डिस्कवरी समय घटाकर यह स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को तेज करेगी।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करते हुए, यह स्थानीय अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है। कम आय वाले देशों में सुलभ स्वास्थ्य समाधान प्रदान करेगा।
प्रो. राजेश कुमार ने बताया, ‘भारत में इस सिस्टम से हम बीमारियों पर तेजी से काबू पा सकेंगे और सस्ते उपचार मुहैया करा सकेंगे।’
यह विदेशी निर्भरता कम करता है, ट्रांसलेशनल रिसर्च को बढ़ावा देता है और महामारी के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करता है।
निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा, ‘अनुसंधान और उद्योग साझेदारी से वास्तविक समस्याओं का हल संभव है।’
इम्जेनेक्स इंडिया संग एमओयू निदान, चिकित्सा और बायोप्रोसेसिंग में सहयोग बढ़ाएगा।
यह पहल भारत को जैव प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाएगी, भविष्य की चुनौतियों के लिए मजबूत आधार देगी।