प्रकृति प्रदत्त औषधीय गोंद आयुर्वेद की अमूल्य निधि हैं, जो पेड़ों के रस से तैयार होते हैं। ये स्वास्थ्य के हर पहलू को मजबूत बनाते हैं—शरीर की थकान मिटाने से लेकर त्वचा, हड्डी, पाचन और हृदय तक की समस्याओं का समाधान प्रदान करते हैं। सही विधि से सेवन करने पर ये चमत्कारिक परिणाम देते हैं।
गर्मियों में कतीरा गोंद शरीर की गर्मी शांत करता है, पेशाब जलन व कब्ज से छुटकारा दिलाता है। बबूल का गोंद हड्डी-पसली मजबूत कर महिलाओं को प्रसव के बाद ताकत देता है तथा जोड़-कमर दर्द मिटाता है।
करया गोंद पेट साफ रखता है, वजन नियंत्रित करता है और भोजन पचाने में सहायता करता है। धावडा गोंद शारीरिक बल बढ़ाता, चोटें भरता और जोश भरता है।
मोरिंगा गोंद हड्डी टूट-फूट रोकता, इम्यूनिटी ऊंची करता और सुस्ती भगाता है। आम गोंद उदर रोग, डायरिया व कमजोरी दूर करता। नीम गोंद खून पाक करता, चमड़ी साफ रखता और कील-मुंहासे हटाता।
पीपल गोंद कफ, सांस की बीमारी व गले दर्द में राहत। बरगद गोंद स्त्रियों के सफेद पानी, दुर्बलता व खून बहना रोकने में उत्तम। बेल गोंद दस्तिशूल, बुखार व आंतों को बलवान बनाता।
गुग्गुल गोंद संधिवात, टिश्यू दर्द, चर्बी व खराब कोलेस्ट्रॉल घटाता। लोबान गोंद दिमाग को सुकून, माइग्रेन व सूजन कम करता।
राल गोंद जख्म चिकना करता, त्वचा विकार व जलन दूर। शल्लकी गोंद आर्थराइटिस, जोड़ों सूजन व मसल दर्द नाशक। हींग गोंद पेट फूलना, खराब हजमा व ऐंठन समाप्त।
अर्जुन गोंद दिल मजबूत, बीपी कंट्रोल व हृदय बल प्रदान। अशोक गोंद मासिक धर्म संतुलन व अधिक खून बहना रोकता।
साल गोंद कट-चोट, फुंसी व स्किन इश्यू सुलझाता। खैर गोंद जीभ के घाव, पतला दस्त व खून रोकता। इमली गोंद पेट ठंडा, मल त्याग आसान व पाचन तेज।
हर गोंद का विशेष महत्व है, लेकिन डॉक्टर वैद्य से परामर्श जरूरी अन्यथा नुकसान हो सकता है।