दावोस के विश्व आर्थिक मंच में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दुनिया भर के निवेशकों को भारत के हरित ऊर्जा क्षेत्र की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। 20 जनवरी को उन्होंने सोलर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन तथा ऊर्जा संग्रहण में भारत की तेज प्रगति पर प्रकाश डाला, जो बड़े प्रोजेक्ट्स को सफल बनाने की क्षमता दर्शाती है।
कनाडा की ला कैस कंपनी के प्रमुख चार्ल्स एमोंड व सारा बुशार्ड के साथ बैठक में भारत में स्वच्छ ऊर्जा निवेश को दीर्घकालिक बनाने पर विस्तृत बातचीत हुई। जोशी ने एक्स पर लिखा कि सोलर, पवन व हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने तथा हाइड्रोजन व स्टोरेज समाधानों पर चर्चा केंद्र में रही।
‘पार्टनर विद इंडिया’ को विस्तार देने की सलाह दी गई, जिससे 2030 के 400 अरब डॉलर जलवायु निवेश का लाभ भारत को मिले। दोनों पक्षों की रणनीतियां परस्पर अनुकूल हैं, जो भारत को स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों तक पहुंचाने में कारगर साबित होंगी।
ओमान के डॉ. सईद अल सकरी से हुई चर्चा में द्विपक्षीय नवीकरणीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया गया। रेगिस्तानी इलाकों में भी भारत की परियोजना सफलताएं निवेशकों के लिए आकर्षक हैं।
सोलर मॉड्यूल, इलेक्ट्रोलाइजर, ग्रीन हाइड्रोजन निर्माण व निर्यात में साझेदारी, हाइड्रोजन हब, एकीकृत प्रोजेक्ट्स व पोर्ट निर्यात सुविधाओं पर निवेश की रूपरेखा बनी। सीईपीए, संयुक्त फंड व आईएसए के माध्यम से ओएसओडब्ल्यूओजी व ग्रीन ग्रिड से जुड़ाव पर सहमति हुई।
भविष्य के टेंडरों में एक साथ भाग लेना व औद्योगिक इनोवेशन को बढ़ावा जैसे बिंदुओं ने सहयोग को ठोस आधार दिया। दावोस की ये पहल भारत के स्वच्छ ऊर्जा अभियान को वैश्विक समर्थन प्रदान करेंगी।