अपनी 550वीं फिल्म के सेट से अनुपम खेर ने कश्मीरी पंडित पलायन दिवस पर सोशल मीडिया के जरिए दर्दभरी यादें ताजा कीं। 19 जनवरी 1990 को घाटी में आतंकियों ने पंडितों पर कहर बरपाया, जिससे पांच लाख लोग विस्थापित हो गए।
एक्स वीडियो में खेर ने कहा, ‘इस दिन घर उजड़े, लाखों ने विस्थापन झेला। दुखद घटनाओं को भूलना गलत है, इन्हें श्रद्धांजलि देनी चाहिए। हम बदलाव नहीं ला सकते, लेकिन स्मृति को संजो सकते हैं।’
370 के खात्मे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने जोर दिया कि सुधार दिख रहे हैं, पर भय का साया बरकरार है। कई वृद्ध पंडितों से मुलाकात का जिक्र कर बताया कि वे कश्मीर लौटना चाहते हैं, मगर असुरक्षा रोक रही है।
कैप्शन में लिखा, ‘जबरन बेदखली, जम्मू कैंपों में शरण। ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने आंशिक सत्य दिखाया। यह दर्दनाक हकीकत है—भूलना मना।’ फिल्म में उनके अभिनय ने राष्ट्रीय बहस छेड़ी थी।
खेर का संदेश पंडित समाज की लड़ाई को मजबूत करता है। यह सुरक्षा और वापसी के वादों पर सवाल उठाता है, ताकि इतिहास दोहराया न जाए। समाज को एकजुट होकर न्याय सुनिश्चित करना होगा।