केला तो सभी खाते हैं, लेकिन इसका छिलका कूड़ेदान का रास्ता अख्तियार कर लेता है। विज्ञान अब प्रमाणित कर चुका है कि यह छिलका बर्बादी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुधार का वरदान है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को अंदरूनी ताकत देते हैं।
अमेरिकी चिकित्सा लाइब्रेरी के अनुसार, छिलके में प्रचुर एंटीऑक्सीडेंट्स कोशिकाओं को हानि से बचाते हैं और डिटॉक्स प्रक्रिया तेज करते हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने में भी यह सहायक है। खास बात, छिलके में केले के फल से दोगुने एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जैसे गैलोकैटेचिन।
फ्री रेडिकल्स से निपटने वाले फ्लेवोनॉइड्स और टैनिन कैंसर व हृदय रोगों से बचाव करते हैं। मजबूत एंटीबैक्टीरियल प्रभाव पेट दर्द, दस्त पैदा करने वाले बैक्टीरिया समाप्त करता है। दांतों और मसूड़ों के लिए भी फायदेमंद।
फंगस विरोधी गुण गैलिक एसिड से समृद्ध हैं। छिलके से बने रंगों में भी ये गुण बरकरार रहते हैं। उपयोग के लिए धोकर स्मूदी, चाय या स्किन केयर में शामिल करें। किसी संवेदनशीलता पर डॉक्टर की सलाह अनिवार्य। केले का छिलका अपनाकर कचरा कम करें और स्वास्थ्य बढ़ाएं।