उन्नाव दुष्कर्म कांड के दोषी पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ गईं। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत और सजा रोक की अर्जी सोमवार को दरकिनार कर दी। अब सेंगर जेल में ही रहेंगे जब तक उनकी मुख्य अपील का फैसला न हो।
अदालत ने सेंगर के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए जमानत से इनकार किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपहरण, बलात्कार और पीड़िता पिता की हिरासत में मौत जैसे जघन्य अपराधों में कोई ढील नहीं दी जा सकती। उन्होंने 7.5 साल से अधिक समय जेल काटा है, फिर भी राहत नहीं।
देरी का ठीकरा सेंगर पर फोड़ा गया, क्योंकि उनकी ओर से बार-बार याचिकाएं दाखिल हुईं। अपील जल्द निपटाने का निर्देश दिया गया।
उन्नाव घटना 2017 से सुर्खियों में रही। 2019 में सजा और जुर्माने ने हंगामा मचा दिया। जमानत का छोटा सा दौर सीबीआई की सुप्रीम कोर्ट अपील पर थम गया।
यह फैसला न्याय व्यवस्था की मजबूती दिखाता है। राजनीतिक रसूख वाले अपराधियों के खिलाफ सजा सुनिश्चित करने में कोर्ट की भूमिका सराहनीय है। मामले का अंतिम अध्याय अभी बाकी है।