ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या दिल की कमजोरी से त्रस्त हैं? अर्जुन के पेड़ की छाल आयुर्वेद की ऐसी दवा है जो हृदय को नई ताकत देती है। जल स्रोतों के आसपास मिलने वाला यह वृक्ष अपनी छाल से चिकित्सा का खजाना लुटाता है।
इसकी शक्तिशाली विशेषताएं हृदय पेशियों को सशक्त बनाती हैं, रक्त प्रवाह को संतुलित रखती हैं और अनियमित धड़कन को ठीक करती हैं। हाई बीपी कंट्रोल, कोलेस्ट्रॉल में कमी तथा हार्ट अटैक से बचाव में यह बेजोड़ है।
एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते हैं, खून को पाक-साफ करते हैं। फ्रैक्चर, चोटें, सूजन पर लेप लगाएं तो जल्दी ठीक। पेचिश, यूरिन इंफेक्शन, अस्थमा, सांस फूलने में काढ़ा या चूर्ण रामबाण।
सेवन सरल: छाल का काढ़ा, दूध के साथ या पाउडर दो बार रोज। हृदय बलवान, शरीर निरोग। मात्रा का ध्यान रखें—ज्यादा लेने से बीपी लो हो सकता है। गर्भिणी या धात्री माताओं को चिकित्सक परामर्श अनिवार्य।
परंपरा और विज्ञान के संगम पर अर्जुन छाल हृदय रक्षा का मजबूत कवच है।