भारत की राजधानी में पोलैंड के डिप्टी प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की और ईएएम एस जयशंकर की बैठक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई चर्चा छेड़ दी। सिकोर्स्की ने टैरिफ को हथियार बनाकर भारत जैसे देशों को निशाना बनाने की रणनीति को नकारा। ट्रंप के दूसरे टर्म में अमेरिका द्वारा रूस तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए जा रहे दबाव के संदर्भ में यह बयान अहम है।
भारत दौरे के पहले चरण में सिकोर्स्की जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल पहुंचे, जहां उन्होंने इसे वैश्विक सांस्कृतिक मंच बताया। दिल्ली में जयशंकर से डेलिगेशन स्तर वार्ता में उन्होंने सीमा पार आतंकवाद पर एकजुटता दिखाई। ‘पोलैंड सरकारी आतंक और हिंसक हमलों का शिकार रहा है,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
टैरिफ मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘मैं आपके विचार से सहमत हूं कि टैरिफ से चुनिंदा हमला गलत है। यूरोप को इसका अहसास है। वैश्विक व्यापार खतरे में है। भारत यूरोप के साथ बंधा रहे—आपके दूतावासों का विस्तार इसका प्रमाण है।’
जयशंकर ने कहा, ‘चुनिंदा कार्रवाई टैरिफ से आगे है, और तरीके भी हैं। उन पर बात होगी।’ फेस्टिवल में पत्नी संग सिकोर्स्की ने यूक्रेन-रूस युद्ध, पोलैंड की भूमिका और यूरोप के बदलावों पर गहन विश्लेषण किया। वेदांता जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में नवतेज सरना के सवालों के जवाब में राजनीतिक-मानवीय आयाम उजागर किए।
पिछले मास 11वें एफओसी में रक्षा, तकनीक, साइबर और एआई सहयोग तेज करने का फैसला हुआ। सचिव सिबी जॉर्ज और व्लादिस्लाव टी. बार्तीशेव्स्की की सह-अध्यक्षता वाली यह बैठक रिश्तों को मजबूत करेगी।
सिकोर्स्की की यह टिप्पणी भारत को व्यापारिक चुनौतियों में मजबूती देती है, द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाती है।