स्वर्ण भस्म आयुर्वेद की वह अमूल्य निधि है जो बुढ़ापे को दवा की तरह दूर भगाती है। सोने की कलई से तैयार यह भस्म शरीर के अंदर से युवावस्था बहाल करती है, थकान मिटाती है और दीर्घायु प्रदान करती है।
यह त्रिदोष संतुलित कर धातु मलिनता दूर करती है। इम्यूनिटी मजबूत, मस्तिष्क सक्रिय और चेहरे पर निखार—ये हैं इसके प्रमुख लाभ। पुरानी बीमारियां भी कंट्रोल में रहती हैं।
उपयोग कैसे करें? 1-2 रत्ती गुनगुने दूध में घोलकर प्रातःकाल लें। पिप्पली चूर्ण या अदरक रस मिलाएं। तीन माह सेवन के बाद एक माह विराम। प्रकृति अनुसार मात्रा समायोजित करें।
संभावित जोखिम से बचने हेतु वैद्य परामर्श अनिवार्य। नकली उत्पादों से दूर रहें। तिल, दूध और केसर युक्त आहार सहायक।
वैज्ञानिक शोध इसके गुणों को प्रमाणित कर रहे हैं। स्वर्ण भस्म से जीवन को स्वर्णिम बनाएं।