कुंभ मेला, जहां करोड़ों की भीड़ आस्था के संगम में डूबती है, बॉलीवुड के लिए सोने की खान रहा है। एक खास सीन – कसम या तकदीर का पल – ने अनेक फिल्मों को अमर बना दिया।
पुरानी यादें ताजा करें तो 1975 की सुपरहिट में प्रेमी का कुंभ किनारे लिया गया प्रण सिनेमा हॉल हिला गया। सच्चे भक्तों के बीच शूटिंग ने फिल्म को घर-घर पहुंचा दिया।
फिर 1990 में फैमिली ड्रामा – खोए बच्चे, बदले की आग, नागा साधुओं के बीच क्लाइमेक्स। संगम की लहरों पर टिका यह मोमेंट बॉक्स ऑफिस पर तूफान लाया।
नई पीढ़ी में भी जादू बरकरार। 2010 की थ्रिलर में कुंभ की भव्यता के बीच चेज सीन और भाग्य का धक्का। ड्रोन शॉट्स ने वैश्विक पहचान दिलाई।
क्यों कामयाब? वास्तविकता का पुट – आखाड़ों की धूम, अखंड जप, चमत्कार। सितारे खुद भीगते हैं, दर्शक जुड़ जाते हैं। आंकड़े गवाह हैं, कुंभ फिल्में दोगुनी चलती हैं।
नासिक कुंभ नजदीक, फिल्मवालों की भनक लगी है। अगला सुपरहिट किसकी तकदीर में? मेला जवाब देगा।