मणिपुर के कांगपोखी जिले में ड्रग माफिया को करारा झटका लगा है। छह दिनों के घोर अभियान में 306 एकड़ अफीम की खेती को नेस्तनाबूद कर दिया गया। यह कार्रवाई नशीले पदार्थों के व्यापार पर सीधी चोट है।
मल्टी-एजेंसी टास्क फोर्स ने पहाड़ी इलाकों में सघन छापेमारी की। चाय बागानों और जंगलों में छिपी फसलों पर नकेल कसी गई। जमीनी टीमें मशीनरी और श्रमिक बल से पौधों को जला डाला और जमीन समतल कर दी।
इस विनाश से माफिया को करोड़ों का नुकसान हुआ है। अफीम यहां से हेरोइन बनाने वाली लैबों तक पहुंचती थी। स्थानीय पंचायतों के सहयोग से कई गुप्त खेतों का पर्दाफाश हुआ।
जिले के डिप्टी कमिश्नर ने इसे जन-विजय बताया। नशे के शिकार युवाओं की संख्या कम करने के लिए यह महत्वपूर्ण है। सरकार अब जिंजर जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। कांगपोखी मॉडल अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बनेगा। नशा मुक्ति की इस जंग में मणिपुर आगे बढ़ रहा है।