भारत की रेल प्रणाली ने पिछले 11 वर्षों में जबरदस्त उड़ान भरी है। केंद्र के अनुसार, हाई-स्पीड ट्रैक की संख्या दोगुनी हो गई है, जो बुनियादी ढांचे में क्रांति का संकेत देती है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2014 के 5,400 किमी से बढ़कर अब 11,200 किमी ट्रैक उपलब्ध हैं।
यह उपलब्धि मोदी सरकार की ‘स्पीड इंडिया’ पहल का फल है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में जापान के सहयोग से प्रगति हो रही है। गुजरात में ट्रायल रन शुरू हो चुके हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस ने 50 से अधिक रूट्स पर यात्रियों को आकर्षित किया है।
पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर 2,800 किमी लंबे हैं, जिससे पैसेंजर ट्रेनें तेज चल सकें। बजट में रिकॉर्ड 2.62 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया। इससे 1.5 करोड़ नौकरियां सृजित हुईं।
चुनौतियां जैसे मौसमी बाधाएं और रखरखाव बनी हुई हैं, लेकिन पीपीपी मॉडल से समाधान हो रहा है। 2035 तक नौ हाई-स्पीड कॉरिडोर बनेंगे। यह नेटवर्क पर्यटन, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देगा।
रेलवे अब आधुनिक शक्ति बन चुका है, जो करोड़ों यात्रियों का सहारा है।