पंजाब सरकार के मीडिया पर दबाव को लेकर फतेहजंग सिंह बाजवा ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सत्ता का मनमाना रवैया उचित नहीं है। एक सार्वजनिक सभा में बोलते हुए उन्होंने पत्रकारों के उत्पीड़न के उदाहरण दिए।
बाजवा ने बताया कि कई चैनलों और अखबारों को आधिकारिक कार्यक्रमों से रोका गया। ‘यह दबाव अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार है,’ उन्होंने कहा। पंजाब में किसान नीतियां, कानून-व्यवस्था जैसी समस्याओं पर रिपोर्टिंग से सरकार बेचैन है।
प्रेस क्लब सक्रिय हो गए हैं, जबकि बाजवा ने स्वतंत्र जांच की मांग की। राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी रणनीति बता रहे हैं। सरकार ने ‘निष्पक्षता’ का हवाला दिया, लेकिन आलोचक इसे सेंसरशिप मानते हैं।
बाजवा ने सभी दलों से एकजुट होने का आह्वान किया। यह मुद्दा पंजाब की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।