बांग्लादेश में चुनावी हलचल तेज हो गई है। 2026 के लोकसभा चुनावों से पहले जेसीडी कार्यकर्ताओं ने ढाका के अगरगांव में चुनाव आयोग कार्यालय को चारों ओर से घेर लिया। पोस्टल बैलेट में भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रभाव के खिलाफ यह आंदोलन तेज हो गया।
रकीबुल इस्लाम के नेतृत्व में भारी संख्या में छात्र आयोग के बाहर जमा हुए। नारे लगाते हुए उन्होंने भेदभावपूर्ण फैसलों की निंदा की। हालात बिगड़ने पर पुलिस, RAB, नेवी और अंसार की फौज तैनात कर दी गई। वाटर कैनन और दंगा नियंत्रण दल सतर्क खड़े रहे।
प्रदर्शनकारियों के तीन मुख्य दावे हैं। एक, बैलेट वितरण में गड़बड़ी। दो, निर्णय प्रक्रिया में सियासी दखल। तीन, SUST छात्र चुनावों पर पक्षपाती नोटिस, जो किसी पार्टी के इशारे पर आया।
इस्लाम ने चेतावनी दी कि सुधार सुझावों को ठुकराकर आयोग ने छात्रों का अपमान किया। पोस्टल बैलेट को हॉस्टल में खुले में रखी चिट्ठी से तुलना की, जहां 160 वोट एक डिब्बे में समेटकर बांटे गए।
सोशल मीडिया पर बहरीन वाले वीडियो वायरल होने से मामला गरमाया। आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने डाक संघ की वजह बताई, लेकिन संशय बना रहा।
दलों की अंतर्कलह और चुनावी संदेह से देश की राजनीति अस्थिर हो रही है। आयोग पर सुधार का दबाव बढ़ा है, ताकि लोकतंत्र की पवित्रता बनी रहे।