एनपीसीसी लिमिटेड में मुआवजा बिलों की हेराफेरी के सनसनीखेज मामले में लंबे समय से फरार दोषी को आखिरकार पुलिस ने दबोच लिया। सीबीआई की इस सफलता से भ्रष्टाचारियों में हड़कंप मच गया है।
राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम (एनपीसीसी) के कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुए जब आरोपीयों ने बिलों में फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने को खाली किया। कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया था, लेकिन एक ने फरार होकर चुनौती दी। देशव्यापी अलर्ट के बावजूद वह छिपा रहा।
गहन निगरानी, बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों से उसका सुराग लगा। आधी रात को छापा मारकर गिरफ्तारी की गई, जहां से घोटाले के सबूत जब्त हुए। पूछताछ में बड़े खुलासे की उम्मीद है।
घोटाले का आकार 50 करोड़ पार होने का पता चला है, जिसमें आंतरिक साठगांठ शामिल थी। एनपीसीसी प्रबंधन ने ब्लॉकचेन तकनीक अपनाने और व्हिसलब्लोअर पॉलिसी लागू करने की योजना बनाई है।
यह घटना सार्वजनिक उपक्रमों में वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने का संकेत देती है। संपत्ति वसूली और सजा सुनिश्चित कर सरकार पारदर्शिता का संदेश देगी। भविष्य के लिए सबक लेते हुए सतर्क रहना जरूरी।