पाकिस्तान के सिंध में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप पिछले साल भयावह रूप ले चुका था। आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि इन बीमारियों ने 103 जिंदगियां लील लीं, जिसमें कराची का योगदान सबसे बड़ा रहा।
बारिश के मौसम में जलकुंड़ियों ने मच्छरों को बढ़ावा दिया। पूरे प्रांत में 15,000 से अधिक संयुक्त मामले दर्ज हुए, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। खासकर शहरी झुग्गी-झोपड़ियों में पहुंच सीमित होने से खतरा बढ़ा।
कराची के कोरंगी और मलीर इलाकों में मौतों का सिलसिला सबसे तेज रहा। बच्चों और बुजुर्गों पर असर ज्यादा पड़ा। चिकित्सकों ने प्लेटलेट्स की कमी और आईसीयू की अपर्याप्तता की शिकायत की।
सरकार पर प्रतिक्रियात्मक नीतियों का आरोप लगा। फॉगिंग केवल 60 प्रतिशत क्षेत्रों तक सीमित रही। एनजीओ ने सहायता की, लेकिन पर्याप्त नहीं था।
नए साल में 500 करोड़ रुपये का एंटी-वेक्टर अभियान शुरू होगा, जिसमें ड्रोन से छिड़काव शामिल है। नागरिक सहभागिता और बेहतर निगरानी से ही इस चक्र को तोड़ा जा सकता है।