शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि बुलिश संकेत न दिखने तक यह दबाव बना रहेगा।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने पिछले 15 दिनों में 22,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे प्रमुख सूचकांक करेक्शन जोन में पहुंच गए हैं और खुदरा निवेशकों में घबराहट फैल गई है।
वैश्विक कारण हावी हैं—मजबूत अमेरिकी डॉलर, फेड के सख्त बयान, और वैश्विक संघर्ष। भारत के ऊंचे वैल्यूएशन ने इसे आसान लक्ष्य बना दिया है।
डीआईआई ने 12,300 करोड़ रुपये की खरीदारी कर सहारा दिया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह बिकवाली के दबाव को पूरी तरह नहीं झेल सकता।
तकनीकी चार्ट बेयरिश दिख रहे हैं। निफ्टी ने महत्वपूर्ण सपोर्ट तोड़े हैं और 200-दिन के मूविंग एवरेज पर रुकावट का सामना कर रहा है। वोलेटिलिटी इंडेक्स 35% उछला है।
तीन महत्वपूर्ण स्तर हैं जिन पर नजर रखें—23,500 से नीचे टूटना तेज गिरावट ला सकता है, जबकि 24,500 से ऊपर ब्रेकआउट राहत देगा। अगले सप्ताह से शुरू हो रही तिमाही कमाई बाजार के लिए पहला बड़ा इम्तिहान होगी।
जल्दबाजी में निवेश न करें। डिफेंसिव सेक्टरों में चयनात्मक खरीदारी और सख्त स्टॉप-लॉस के साथ आगे बढ़ें। सकारात्मक संकेत मिलने तक धैर्य रखें।