आंध्र की सियासत और सिनेमा के धुरंधर एनटीआर की 30वीं पुण्यतिथि पर हैदराबाद में भावभीनी सभा हुई। बेटे बालकृष्ण ने नेतृत्व किया, पोते नंदमुरी और नारा लोकेश ने यादें ताजा कीं।
सुबह से समाधि पर पूजा-अर्चना चली। बालकृष्ण ने कहा, ‘पापा ने 1983 में कांग्रेस को उखाड़ फेंका, टीडीपी से तेलुगुओं को नई पहचान दी।’ आंसू भरी उनकी वाणी ने सबको रुला दिया।
नंदमुरी ने पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डाला, जबकि लोकेश ने ट्वीट से भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई और किसान योजनाओं को उजागर किया।
फिल्मी गीत, नाटक और चैरिटी कैंप ने दिन को यादगार बनाया। एनटीआर की ‘मायाबाजार’ जैसी फिल्में आज भी प्रासंगिक हैं।
परिवार ने वचन दिया कि एनटीआर का ‘तेलुगु गौरव’ का संदेश जीवंत रखेंगे। यह पुण्यतिथि उनकी अमर गाथा का उत्सव बनी।