सर्वाइकल कैंसर महिलाओं का दुश्मन नंबर एक है और इसका पीक जोखिम 30 से 40 की दहाई में होता है। अनुभवी डॉ. मीरा पाठक इस गंभीर मुद्दे पर विस्तार से बता रही हैं, ताकि आप सही समय पर सावधानी बरत सकें।
यह बीमारी एचपीवी संक्रमण से जन्म लेती है, जो सालों तक लक्षणरहित रह सकता है। 20 की उम्र में 80 प्रतिशत संक्रमण ठीक हो जाते हैं, लेकिन मध्य 30s में अगर न रहे तो घातक हो जाता है। विशेषज्ञ के अनुसार, ‘इस दौरान हार्मोनल बदलाव और इम्यूनिटी की कमजोरी कैंसर को न्योता देती है।’
जोखिम कारक—धूम्रपान जो खतरे को दोगुना कर देता है, कई पार्टनर, लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियां। भारत जैसे देशों में देरी से पता चलने पर हालात बदतर हो जाते हैं। राष्ट्रीय आंकड़े दिखाते हैं कि यह उम्र ग्रुप सबसे प्रभावित है।
बचाव के लिए वैक्सीनेशन जरूरी—बच्ची बेटियों को 9 साल की उम्र में दें। नियमित स्क्रीनिंग से 90 प्रतिशत मामलों को रोका जा सकता है। डॉ. पाठक के केस स्टडीज बताते हैं कि जागरूक मरीज स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
अंत में, सतर्कता ही कुंजी है। इस उम्र में लापरवाही न बरतें, नियमित जांच करवाएं। स्वास्थ्य आपका अधिकार है, इसे सुरक्षित रखें।