भारत की समुद्री संपदा को बायोटेक्नोलॉजी से सशक्त बनाने का वादा किया केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था को गति देगा, पर्यावरण की रक्षा करेगा और नौजवानों के लिए रोजगार के द्वार खोलेगा।
2 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक समुद्री क्षेत्र में खनिज, जैव विविधता प्रचुर है। सिंह ने समुद्री शैवाल से जैव ईंधन, मछलियों के आनुवंशिक सुधार और प्लास्टिक खाने वाले बैक्टीरिया जैसे नवाचारों का जिक्र किया। ‘यह आत्मनिर्भर भारत का आधार बनेगा,’ उन्होंने कहा।
सरकारी योजनाएं जैसे प्रगत डीप सी मिशन और मत्स्य संपदा योजना मछली उत्पादन दोगुनी करेंगी। तटीय गांवों में कौशल प्रशिक्षण से महिलाओं को सशक्त किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण में मैंग्रोव पुनरुद्धार और समुद्री कार्बन अवशोषण महत्वपूर्ण होंगे। 5 अरब डॉलर निवेश से तकनीकें विकसित होंगी। नॉर्वे मॉडल से प्रेरणा ली जा रही है।
विशेषज्ञ आशावादी हैं, 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान है। सागरमाला से बंदरगाह मजबूत होंगे। सिंह के अनुसार, ‘समुद्र हमारी संपत्ति हैं, इन्हें समझदारी से उपयोग करें।’ यह क्रांति समृद्ध भारत की नींव रखेगी।