केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने समुद्री विज्ञान व बायोटेक्नोलॉजी को भारत की आर्थिक मजबूती का आधार बताया। उनके अनुसार, यह न केवल रोजगार बढ़ाएगा बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी करेगा। विशाल जैव विविधता वाले समुद्री क्षेत्र से व्यावसायिक लाभ उठाना समय की मांग है।
मरीन संसाधनों से औषधियां, सौंदर्य प्रसाधन और जैव ईंधन बनेंगे। जीनोम मैपिंग और एआई निगरानी पर फोकस है। एक्वाकल्चर से प्रोटीन मांग पूरी होगी, मछली पकड़ने का दबाव कम होगा।
पर्यावरणीय लाभ उल्लेखनीय हैं। केल्प खेती से सीओ2 सोखा जाएगा। जापान-अमेरिका जैसे देशों से तकनीक हस्तांतरण होगा। तटीय युवाओं के लिए कौशल अकादमियां बनेंगी।
निजी क्षेत्र की भागीदारी से निवेश बढ़ेगा। 2030 तक करोड़ों नौकरियां पैदा होंगी। नीतिगत सुधारों से अनुमोदन सरल होंगे। समुद्री पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए नियामक ढांचा बनेगा।
नॉर्वे-चिली मॉडल प्रेरणा देंगे। जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु बायोपॉलिमर बाधाएं बनेंगी। जितेंद्र सिंह ने आत्मनिर्भर भारत से जोड़कर देखा इसे। समुद्र की लहरें विकास की नई धारा बनेंगी।