भारत में सर्वाइकल कैंसर की भयावहता को देखते हुए सरकार ने एचपीवी टीकाकरण और डीएनए जांच पर जोर दिया है। यह रणनीति देशभर में महिलाओं के स्वास्थ्य को मजबूत करने का प्रयास है, जहां यह कैंसर सालाना हजारों जिंदगियां लील लेता है।
राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार, भारत में सर्वाइकल कैंसर के 1.2 लाख नए केस दर्ज होते हैं। एचपीवी स्ट्रेन-16 और 18 इसके 70 प्रतिशत मामलों के लिए दोषी हैं। समय पर वैक्सीनेशन से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
9 से 14 साल की लड़कियों को मुफ्त एचपीवी वैक्सीन दी जाएगी। स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर विशेष ड्राइव चलेंगी। राज्यों को 90 प्रतिशत कवरेज का लक्ष्य दिया गया है।
स्क्रीनिंग में डीएनए टेस्टिंग को बढ़ावा मिलेगा। यह विधि वायरस का जल्दी पता लगाती है और घर पर नमूना संग्रह संभव बनाती है। पायलट प्रोजेक्टों में सफलता मिली है, जिसे अब पूरे देश में फैलाया जाएगा।
‘यह तकनीक ग्रामीण भारत के अनुकूल है,’ कहते हैं कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अजय मेहता। लैब नेटवर्क मजबूत करने के लिए 500 करोड़ का प्रावधान किया गया।
टीका विरोध और पहुंच की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता अभियान तेज हैं। सरकारी-पार्टनरशिप से वैक्सीन उत्पादन बढ़ेगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के लक्ष्यों के अनुरूप, भारत 2030 तक इस कैंसर को समाप्त करने की दिशा में अग्रसर है। प्रयासों से सकारात्मक बदलाव दिख रहा है।