अगले महीने बांग्लादेश में होने वाले आम चुनावों से पहले लैंगिक हिंसा और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ने से अंतरिम सरकार की पोल खुल रही है। मुख्य सलाहकार यूनुस पर मानवाधिकार बचाने में लापरवाही के सवाल उठे हैं।
पुलिस आंकड़ों से साफ है कि जनवरी-जून 2025 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के केस 2024 से ज्यादा। एचआरडब्ल्यू की शुभजीत साहा ने कट्टरपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया, जो महिला सशक्तिकरण के खिलाफ हैं। मई के विरोध प्रदर्शनों ने हिंसा को हवा दी।
हाल के महीनों में हिंदुओं पर 51 हमले, 10 हत्याओं सहित। दीपूचंद्र दास का मामला सबसे बर्बर। चटगांव के आदिवासी सुरक्षा बलों से त्रस्त।
महिलाओं की राजनीतिक उपेक्षा चिंता का विषय। 51 पार्टियों में से 30 बिना महिला उम्मीदवार के। जमात ने 276 में शून्य। इतिहास में सबसे कम महिला भागीदारी का खतरा।
इस हफ्ते ढाका में संगठनों ने चुनाव आयोग पर सवाल दागे। आरक्षित सीटें नहीं, योग्यता से जीत चाहिए। यूनुस सरकार को अब कदम उठाने होंगे वरना लोकतंत्र की नींव हिलेगी।