सड़क सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए त्रिपुरा में ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ नियम लागू हो गया है। सभी पेट्रोल पंपों पर बिना सिर ढकने वाले सवारी करने वालों को पेट्रोल देने पर पूर्ण प्रतिबंध है। यह कदम 450 से अधिक सड़क मौतों के आंकड़ों के बाद उठाया गया, जिनमें अधिकांश टू-व्हीलर चालक थे।
सीएम माणिक साहा के नेतृत्व में बनी यह नीति बहुआयामी है। इसमें हेलमेट जांच के लिए पुलिस नाके, स्कूलों में शिक्षा कार्यक्रम, 1 लाख सस्ते हेलमेट वितरण और डिजिटल फाइन सिस्टम शामिल हैं। पंप कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है।
जुर्माने 500 रुपये से शुरू होकर बढ़ेंगे, साथ ही वाहन सीज का डर। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हेलpline और हेलमेट डिलीवरी की व्यवस्था है। विपक्ष सड़क सुधार की मांग कर रहा है, लेकिन मंत्री सुशांत चौधरी इसे ‘गेम चेंजर’ बता रहे हैं।
कर्नाटक जैसे राज्यों के 25 प्रतिशत कमी के आंकड़े उत्साह बढ़ा रहे हैं। भविष्य में स्मार्ट सिग्नल और ट्रेनिंग मॉड्यूल जोड़े जाएंगे।
अभियान की शुरुआत के साथ त्रिपुरा सुरक्षित सड़कों की ओर बढ़ रहा है। नागरिकों से अपील है—हेलमेट पहनें, जीवन बचाएं।