यूरोपीय संघ ने नाइजीरिया को अपनी उच्च जोखिम वाली मनी लॉन्ड्रिंग सूची से बाहर निकालकर बड़ी राहत दी है। यह कदम देश के वित्तीय कदमों की प्रशंसा करता है, मगर अमेरिका के साथ बढ़ते विवाद ने वैश्विक संतुलन को जटिल बना दिया है। नाइजीरिया अब बहुआयामी विदेश नीति अपनाने को मजबूर है।
ईयू का निर्णय निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगा और आर्थिक सहयोग को गति देगा। ब्रसेल्स ने नाइजीरिया के सुधारों को सराहा, जो व्यापारिक रुकावटें दूर कर सकता है।
अमेरिका पक्ष में हालात उलट हैं। आईएसआईएस प्रभावित इलाकों पर हमलों और ट्रंप के अपमानजनक बयानों ने तनाव पैदा किया। नाइजीरिया अपनी आतंकी विरोधी मुहिमों को सही ठहराता है, लेकिन वॉशिंगटन मानवाधिकार और लोकतंत्र पर सवाल उठाता रहता है।
चुनावी प्रक्रिया और सैन्य कार्रवाइयों पर असंतोष से हथियार सप्लाई प्रभावित हुई। ईयू की आर्थिक नजर बनाम अमेरिका का मूल्य-आधारित दृष्टिकोण साफ दिखता है। नाइजीरिया अब कई देशों से संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है।
आंतरिक राजनीति में यह सरकार के पक्ष में काम आएगा। ईयू से मान्यता साख बढ़ाएगी, अमेरिकी आलोचना को खारिज किया जाएगा। कुल मिलाकर, आर्थिक फायदे और रणनीतिक सोच नाइजीरिया को मजबूत बनाएंगे।