एक भावपूर्ण खुलासे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदा स्टेशन पर अपने युवा मित्रों से हुई यादगार भेंट का जिक्र किया। सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने उस खुशी भरे पल को जीवंत कर दिया, जो उनके जीवन का विशेष अध्याय बन गया।
ऐतिहासिक मालदा टाउन स्टेशन पर यह घटना घटी, जो बंगाल को पूर्वोत्तर से जोड़ता है। तब युवा नेता मोदी अपने साथियों से मिले, जहां देश-विषयों पर गहन चर्चाएं हुईं। ट्रेनों की आवाजाही के बीच बनी यह दोस्ती आज भी मजबूत है।
इस स्मृति पर चिंतन करते हुए पीएम ने युवा ऊर्जा की ताकत पर जोर दिया। ‘मालदा के वे पल मुझे नेतृत्व की कला सिखाते रहे,’ उन्होंने उल्लेख किया, जो स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं से जुड़ता है।
प्रतिक्रिया सकारात्मक रही, युवा समूह मालदा जाकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे जन-नेतृत्व की रणनीति मानते हैं। बंगाल की राजनीति में यह आरएसएस काल की यादें ताजा करता है।
डिजिटल युग में यह कहानी आमने-सामने की दोस्ती की महत्ता बताती है। मोदी जी के नेतृत्व में यह प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी, जो साधारण रेल स्टेशनों से शुरू हुई असाधारण यात्रा का प्रतीक है।