पूरे देश में गंगा नदी डॉल्फिन की दूसरी गणना का शुभारंभ बिजनौर से हो गया है। यह प्रयास लुप्तप्राय प्रजाति की आबादी का सटीक आकलन करने और संरक्षण उपायों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
कई राज्यों में 200 से अधिक टीमें नावों, जीपीएस और जैव-ध्वनि उपकरणों से लैस होकर नदी मार्गों पर उतर पड़ी हैं। सुबह-शाम के समय, जब डॉल्फिनें सक्रिय रहती हैं, प्रत्यक्ष दर्शन और समूह आकार नोट किए जा रहे हैं।
बांध, रेत उत्खनन और जालों में फंसने से डॉल्फिन संकट में हैं। 2023 की गिनती में लगभग 2,500-3,000 की संख्या का अनुमान था। इस वर्ष नागरिक विज्ञान ऐप्स और एआई विश्लेषण से सटीकता बढ़ेगी।
बिजनौर के जल में डॉल्फिन झुंड दिखे, जो उत्साह बढ़ा रहे हैं। मछुआरों को संरक्षक बनाया गया है। ‘डॉल्फिन स्वच्छ नदियों का प्रतीक हैं,’ कहते हैं विशेषज्ञ। डॉल्फिन अभयारण्य स्थापित करने की योजना है।
मानसून से पहले गिनती तेज हो रही है। परियोजना डॉल्फिन के तहत सरकारी समर्थन है। अंतिम आंकड़े दशकभर की कार्ययोजना बनाएंगे, जिससे नदियों का जैव-विविधता संरक्षित रहे।