केप टाउन के समुद्री जल में चीन-रूस के साथ दक्षिण अफ्रीका का नौसेना अभ्यास हुआ, लेकिन भारत नदारद रहा। विदेश मंत्रालय ने इसे ब्रिक्स का ‘नियमित’ कार्यक्रम बताने वाली खबरों को खारिज कर दिया।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘यह पूरी तरह दक्षिण अफ्रीकी पहल थी। कुछ ब्रिक्स सदस्यों ने भाग लिया, लेकिन यह कोई संस्थागत गतिविधि नहीं। भारत ऐसी अनौपचारिक ड्रिल से दूर रहता है।’
जनवरी 9-16 के बीच ‘विल फॉर पीस 2026’ में चीनी जहाज तांगशान-ताइहू, रूसी स्टोइकी और दक्षिण अफ्रीकी अमाटोला ने समन्वय में ड्रिल किए। फोकस रहा समुद्री स्ट्राइक, पाइरेटी रेस्क्यू, सर्च-रिलीफ और फॉर्मेशन मैन्यूवर पर।
प्रेटोरिया ने 30 दिसंबर को घोषणा की थी कि यह ब्रिक्स प्लस नौसेनाओं को एकजुट कर सुरक्षा संचालन, अंतरसंचालन ड्रिल और आर्थिक समुद्री रक्षा के लिए तैयार करता है। थीम पर सहमति बनी ‘शिपिंग लेन और व्यापार की सुरक्षा’।
चीन ने बताया कि जहाजों ने सिंगल लाइन फॉर्मेशन में नेविगेट किया, बदलाव किए और अंतरराष्ट्रीय चालक दल ने एक-दूसरे का साथ दिया। संचार, एंकर डिफेंस और वायु सहयोग पर क्रमिक अभ्यास हुए।
इसके जवाब में भारत आईबीएसएएमएआर पर जोर देता है—भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका का त्रिपक्षीय प्लेटफॉर्म, जो 2024 में अक्टूबर को संपन्न हुआ।
ब्रिक्स की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं के दौर में भारत का रुख रणनीतिक है। यह स्वायत्तता बनाए रखते हुए चयनित साझेदारियों को प्राथमिकता देता है, खासकर संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में।