अमेरिका के कठोर टैरिफ ने कोयंबटूर-तिरुपुर के वस्त्र उद्योग को हिला दिया है। निर्यात में 35 प्रतिशत की भारी कमी से 50,000 से अधिक नौकरियां चली गईं और सैकड़ों फैक्ट्रियां ठप हो गईं। कभी अमेरिकी बाजार की चमक से जगमगाने वाला यह इलाका अब बेरोजगारी की मार झेल रहा है।
एपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के आंकड़े साफ बताते हैं कि यूएस को शिपमेंट में भारी गिरावट आई है। निर्माता एस. मुरुगन ने बताया, ‘हमारे उत्पाद अचानक महंगे हो गए, प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई।’ खासकर मेनस्ट्रीम निटवियर और हॉजरी प्रभावित हुए हैं।
मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा पीड़ित है। कार्यबल का 60 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो परिवार का भरण-पोषण करती हैं। हॉस्टल खाली पड़े हैं और ग्रामीण इलाकों में रेमिटेंस रुक गए हैं। चपरासी से लेकर सप्लायर तक सब परेशान हैं।
घरेलू बिक्री और ऑस्ट्रेलिया-आसियान बाजारों पर नजर है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं। तमिलनाडु सरकार ने बिजली बिल माफी और ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए हैं। केंद्र की पीएलआई स्कीम से उम्मीद बंधी है।
वैश्विक व्यापार में बदलाव जरूरी है। उद्योग को टिकाऊ फैब्रिक और ऑटोमेशन अपनाना होगा। यह संकट एकल बाजार पर निर्भरता का सबक सिखा रहा है।