योगी सरकार के ध्वजवाहक जीरो पावर्टी अभियान को अब उच्च शिक्षा संस्थानों से मिल रही है मजबूत ‘धार’। उत्तर प्रदेश में गरीबी को जड़ से समाप्त करने के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु यूनिवर्सिटीज और कॉलेज सक्रिय मोर्चे पर उतर आए हैं। यह साझेदारी राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाली साबित हो सकती है।
राज्य सचिवालय में वाइस चांसलरों के साथ बैठक में सीएम योगी ने स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए। संस्थानों को अपने आसपास के क्षेत्रों में गरीब परिवारों का सर्वे कराना होगा। आय, रोजगार, आवास जैसी जानकारियों के आधार पर उन्हें 25 से अधिक कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
‘युवा शक्ति और ज्ञान शक्ति मिलकर गरीबी का अंत करेंगे,’ योगी के उद्घोष से युवा उत्साहित हैं। विशेषज्ञ प्रोफेसरों द्वारा तैयार रणनीतियां जैसे माइक्रोफाइनेंस और वोकेशनल ट्रेनिंग पर जोर दिया जा रहा है। लखनऊ यूनिवर्सिटी ने ‘गरीबी मुक्त गांव’ अभियान शुरू कर दिया है।
पिछले वर्षों में यूपी ने बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी चुनौतियां बाकी हैं। डिजिटल ऐप और जीआईएस मैपिंग से अभियान को सटीकता मिलेगी। केंद्र सरकार का समर्थन और सीएसआर फंडिंग इसे और मजबूत बनाएंगे।
यह प्रयास न केवल तात्कालिक राहत देगा बल्कि दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करेगा। उत्तर प्रदेश गरीबी उन्मूलन का मॉडल बनकर उभरेगा, जिसमें शिक्षा जगत की भूमिका सराहनीय रहेगी।