भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन ने 15 जनवरी को सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर डेरा डाला। आईएनएस तिर, शार्दुल, सुजाता और आईसीजीएस सारथी इस युद्धपोत समूह का हिस्सा हैं, जो दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में विस्तृत प्रशिक्षण यात्रा पर हैं।
आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026 की पृष्ठभूमि में यह प्रवास रणनीतिक है। भारत व सिंगापुर नौसेनाएं सामर्थ्य संवर्धन, महासागरीय सुरक्षितता तथा सहकार्य के लिए बहुआयामी प्रयासरत हैं। अधिकारियों के प्रशिक्षण विनिमय, सामूहिक योगाभ्यास तथा क्रीड़ा आयोजन उल्लेखनीय हैं।
सांस्कृतिक आयाम में नौसैनिक वाद्य दल सिंगापुर के चिह्नित स्थानों पर धूम मचाएगा। विद्यार्थियों को पोताभ्यंतर भ्रमण का अवसर मिला, नौसेना की दिनचर्या से परिचय कराने हेतु।
उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने दस्ते के प्रशिक्षुओं का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण सिद्धांतों पर कमांडर से वार्ता की। सूचना फ्यूजन केंद्र ने व्यावहारिक जानकारियां प्रदान कीं।
अगले दिन जनसंपर्क, आरएसएन से संयुक्त चर्चाएं, केंद्र-संग्रहालय यात्रा, खेल स्पर्धाएं और नारायण वृद्धाश्रम में कल्याणकार्य संपन्न हुए। एक्ट ईस्ट नीति के अनुरूप दक्षिण-पूर्वी राष्ट्रों से बंधन प्रगाढ़ हो रहे हैं।
समुद्री सहयोग को प्रोत्साहित करता यह चरण आईओएनएस नेतृत्व तथा भारत के महासागरीय स्वप्न का प्रतीक है। स्क्वाड्रन का सफर इंडोनेशिया व थाईलैंड तक जारी रहेगा।