माता-पिता का साथ पाकर मिनिषा लांबा ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, लेकिन डेब्यू फिल्म के सेट पर एक करारा चांटा उनकी उम्मीदों पर भारी पड़ा। यह अनुभव भले ही दर्दनाक था, लेकिन उनकी करियर की नींव मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ।
परिवार के हौसले ने मिनिषा को दिल्ली से मुंबई की राह दिखाई। गोविंदा के साथ ‘आशिक आवारा’ में काम मिला, जो उनके लिए बड़ा ब्रेक था। शूटिंग के पहले ही दिन एक सीन में चांटा इतना जोरदार लगा कि पूरी यूनिट चौंक गई।
मिनिषा ने इस सदमे को हजम किया और आगे बढ़ीं। ‘ये दिल्लगी’, ‘कुछ तो है’ जैसी फिल्मों से उन्होंने दर्शकों का दिल जीता। सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा के साथ स्क्रीन शेयर की और स्टार बनीं।
वह थप्पड़ अब उनकी सफलता की कहानी का हिस्सा है। माता-पिता की भूमिका को वे कभी नहीं भूलतीं। बॉलीवुड की दुनिया में टिकने के लिए उनका मानना है कि परिवार का सहारा और व्यक्तिगत संघर्ष जरूरी हैं।
मिनिषा की जर्नी युवा कलाकारों को सिखाती है कि शुरुआती झटके स्थायी नहीं होते। दृढ़ संकल्प से हर बाधा पार की जा सकती है।