कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के दौर में मनरेगा भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका था, यह कहना था भाजपा नेता अरुण सिंह का। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने योजना के दुरुपयोग की मिसालें गिनाईं, जहां ग्रामीणों को रोजगार देने के नाम पर पैसे की होली खेली गई।
उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भारी अनियमितताएं सामने आईं, जहां मास्टर रोलों में हेरफेरी से करोड़ों डूब गए। सिंह ने 2013 की सीएजी रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें 50 हजार करोड़ से अधिक की गड़बड़ी का खुलासा हुआ। उन्होंने वर्तमान सरकार के सुधारों—जैसे जीपीएस टैगिंग, बैंक ट्रांसफर और सोशल ऑडिट—को क्रांतिकारी बताया।
कांग्रेस ने खारिज किया यह दावा, लेकिन मंत्रालय के आंकड़े बेहतर कार्यान्वयन दिखाते हैं। चुनाव नजदीक आते ही यह विवाद तेज हो गया है। अरुण सिंह के बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है।
यह टकराव कल्याण योजनाओं की सफलता पर सवाल उठाता है और मतदाताओं को सोचने पर मजबूर करता है।