पाकिस्तान की रेल प्रणाली अभूतपूर्व संकट से जूझ रही है। ट्रेन इंजनों की खराबी के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं, जिसका सीधा असर यात्रियों और व्यापार पर पड़ रहा है। प्रतिदिन दर्जनों ट्रेनें खराब इंजनों के कारण रुक जा रही हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, आर्थिक तंगी मुख्य वजह है। रेलवे का वार्षिक घाटा 50 अरब रुपये से अधिक हो चुका है। इस वजह से रखरखाव बजट में भारी कटौती हुई और इंजनों की मरम्मत रुक गई। 450 इंजनों में से 300 से अधिक पुराने कबाड़ हो चुके हैं।
भ्रष्टाचार ने हालात बदतर बना दिए। मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्टों में भारी भ्रष्टाचार सामने आया है। नकली पुर्जे लगाए जा रहे हैं और स्क्रैप बेचकर सरकारी खजाने को लूटा जा रहा है।
मिलावटी डीजल इंजनों के दुश्मन नंबर एक के रूप में उभरा है। खराब ईंधन से इंजन के हाई-प्रेशर पार्ट्स खराब हो रहे हैं। ड्राइवरों पर अधिक स्पीड और भारी लोड के साथ चलाने का दबाव है, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
आम जनता बेहद नाराज है। सोशल मीडिया पर खराब इंजनों के वीडियो वायरल हो रहे हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो रही है। व्यापारियों को कच्चा माल समय पर न मिलने से उत्पादन ठप हो रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने हस्तक्षेप किया है। 15 अरब रुपये का इमरजेंसी फंड जारी होगा और चीनी इंजनों की खरीद शुरू होगी। लेकिन बिना सिस्टम में सुधार के लंबे समय तक राहत मिलना मुश्किल है। रेलवे को बचाने के लिए व्यापक क्रांति जरूरी है।