सतीशन ने सीपीआई-एम को आईना दिखाते हुए केएम मणि के साथ उनके व्यवहार की पोल खोल दी। पहले अपमानित किया, अब गले लगाने की होड़—यह राजनीतिक अवसरवादिता का जीता-जागता उदाहरण है। केरल कांग्रेस प्रमुख मणि का यह सफर चर्चा का विषय बन गया है।
2016 में बार घोटाले के बाद सीपीआई-एम ने मणि पर हमला बोला। उनके घर के बाहर धरने, विधानसभा में हंगामा—सब कुछ हुआ। मणि को नैतिक रूप से भ्रष्ट बताकर राजनीति से बाहर करने की कोशिश की गई।
लेकिन चुनावी समीकरण बदलते ही सीपीआई-एम का रुख पलट गया। अब गठबंधन की चर्चाएं जोरों पर हैं। सतीशन ने तिरुवनंतपुरम की सभा में कहा, ‘मणि को पहले कीचड़ में मिलाया, अब स्वागत कर रहे हो। यह क्या राजनीति है?’ श्रोताओं ने तालियों से समर्थन दिया।
केरल की राजनीति में गठबंधन सामान्य हैं, लेकिन इतना खुला यू-टर्न कम ही देखा जाता है। मणि की पार्टी केंद्रीय केरल में मजबूत है, जहां ईसाई वोटर निर्णायक हैं। सतीशन ने कहा कि ऐसी चालाकियां जनता को बेवकूफ नहीं बनाएंगी।
यह विवाद विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है। सीपीआई-एम के आंतरिक कलह की आशंका है। सतीशन उभरते नेता के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। केरल की जनता सिद्धांतों वाली राजनीति की मांग कर रही है। यह घटना उस दिशा में एक कदम है।