पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अफगान शरणार्थियों पर पुलिस का प्रहार तेज हो गया है। दर्जनों को पकड़कर अस्थायी कैंपों में ठूस दिया गया, जिसमें एक पत्रकार भी फंस गया। निर्वासन अभियान से बेघर समुदाय दहशत में है।
खामा प्रेस के हवाले से खबर है कि बी-17 से हाजी कैंप तक लोगों को ले जाया गया। पुलिस पर फैसल टाउन में रिश्वतखोरी, मारपीट और रात्रिकालीन छापों के आरोप हैं। सिविल ड्रेस में ऑपरेशन चलाने से भय और बढ़ा।
मीडिया कर्मी की हिरासत ने अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरे की घंटी बजा दी। अधिकार संगठन चेताते हैं कि बिना कागजात के रहने वाले शरणार्थी असुरक्षित हैं। अफगानिस्तान वापसी घातक साबित हो सकती है।
एमनेस्टी ने शरीफ सरकार को चेतावनी दी है कि 1.10 लाख लोग खतरे में हैं। पत्र में अवैध हिरासत रोकने, यातनाओं पर अंकुश लगाने और संरक्षण देने की मांग है। महिलाओं व कार्यकर्ताओं का विशेष उल्लेख।
चार दशकों की मेजबानी के बावजूद, 2023 की नीति ने हवा बदली। कुछ पंजीकृत शरणार्थी भी बेघर हो रहे। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। क्या पाकिस्तान मानवीयता को प्राथमिकता देगा?