भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दस साल पहले सपना था, आज हकीकत। ‘स्टार्टअप इंडिया’ ने चार यूनिकॉर्न से 120+ तक का सफर तय कर उद्यमिता को नई ऊंचाइयां दीं।
शुरुआत सरकारी समर्थन से हुई—एंजेल टैक्स में छूट, एकल विंडो क्लियरेंस और इंक्यूबेशन सेंटर्स। डीपीआईआईटी मान्यता ने सरकारी ठेकों के दरवाजे खोले। परिणामस्वरूप, 100 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया।
झूमो, ओला, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां वैश्विक पटल पर चमकीं। टियर-2 शहरों में भी स्टार्टअप्स फले-फूले। 12 लाख नौकरियां पैदा हुईं, जीडीपी में योगदान बढ़ा।
कोविड ने परीक्षा ली, लेकिन रेजिलिएंस जीत गया। फंडिंग विंटर के बावजूद यूनिकॉर्न बने।
आगे सस्टेनेबल ग्रोथ और आईपीओ पर जोर। यह पहल भारत को इनोवेशन हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई।