हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के खंभे पंडित गुलाम मुस्तफा खान ने बॉलीवुड को एक नया आयाम दिया। वे सिर्फ गायक नहीं, बल्कि आवाजों के शिल्पकार थे, जिन्होंने सिनेमा के गीतों को रागों की गहराई से भर दिया।
उनका जन्म संगीतमय परिवार में हुआ। बारदा प्रसाद घोष और लक्ष्मणराव जाधव जैसे आचार्यों से प्रशिक्षण लेकर वे विश्व पटल पर चमके। रवि शंकर के साथ मंच साझा किया, फिर बॉलीवुड में कदम रखा।
1950 के दशक में हारमोनियम वादक के रूप में शुरूआत, लेकिन जल्द ही वे वोकल कोच बने। मोहम्मद रफी से साधना सरगम तक, हर कलाकार ने उनकी कक्षाओं में सूर और तान सीखी। यादों की बारात का ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ या परदेस का ‘ये दिल दीवाना’ – उनकी छाप साफ दिखती है।
खुद 200 फिल्मों में गाया, जिनमें यादों की बारात और आंधी शामिल हैं। जीएमके वॉयस फाउंडेशन की स्थापना कर उन्होंने संगीत शिक्षा को नया रूप दिया। लता मंगेशकर पुरस्कार समेत कई सम्मान हासिल किए।
जनवरी 2021 में उनका निधन हुआ, लेकिन शिष्य जैसे उदित नारायण, श्रेया घोषाल उनकी राह पर हैं। ऑनलाइन क्लासेस तक चलाकर उन्होंने परंपरा को जीवंत रखा। पंडित जी का संदेश साफ है – संगीत भक्ति है, और बॉलीवुड उसकी सच्ची पूजा।