मदुरै का प्रसिद्ध पालामेडु मैदान आज जल्लीकट्टू के रंग में रंग गया, जहां 600 नन्हे साहसी 1000 तेज-तर्रार बैलों के सामने उतरे। इस पारंपरिक बैल दौड़ प्रतियोगिता ने पर्यटकों और स्थानीयों को एकत्रित कर दिया, जो तमिल संस्कृति का जीवंत प्रमाण है।
प्रतियोगिता की शुरुआत भोर में हुई, जब बैल द्वार खुलते ही दौड़े। खिलाड़ी दौड़ लगाते हुए बैलों पर चढ़ने की कोशिश करते हैं और पुरस्कार जीतने के लिए कूबड़ पकड़ते हैं। बैलों की शानदार सजावट—रंग, घंटियां और ध्वज—दृश्य को और भव्य बनाते हैं।
निगरानी के लिए कड़े सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं, जिसमें ड्रोन कैमरे, भारी पुलिस बल और एम्बुलेंस शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप बैलों की जांच और खिलाड़ियों की फिटनेस सुनिश्चित की गई।
मुकाबले में कई रोमांचक पल आए, जैसे युवा खिलाड़ी मुथु ने पांच बैलों को हराया। लाखों दर्शक सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर रहे हैं। जल्लीकट्टू विवादास्पद होने के बावजूद तमिलनाडु की पहचान बना हुआ है, जो साहस की मिसाल पेश करता है।