बीएमसी चुनाव मुंबई की सियासत का सबसे बड़ा इम्तिहान बन चुका है। 1985 से उद्धव ठाकरे की शिवसेना का किला बरकरार था, लेकिन अब देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी-महायुति इसे हिलाने पर तुली है। आदित्य और तेजश्री ठाकरे मोर्चे संभाल रहे हैं।
बीएमसी का सालाना बजट 52 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा। यह न केवल विकास कार्य करता है, बल्कि पार्टियों के लिए फंडिंग का स्रोत भी रहा। शिवसेना विभाजन के बाद शिंदे गुट ने फडणवीस का साथ दिया, जिससे ठाकरे खेमे की मुश्किलें बढ़ीं।
प्रचार युद्ध जोरों पर। फडणवीस भ्रष्टाचार पर हमलावर: ‘बीएमसी को पारदर्शी बनाएंगे।’ आदित्य सोशल मीडिया पर सक्रिय, मराठी अस्मिता का नारा बुलंद। तेजश्री घर-घर जाकर समर्थन मांग रही हैं।
कोलाबा से धारावी तक सभी वॉर्ड्स में कांटे की टक्कर। बाढ़ नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, अवैध बंगले प्रमुख विवाद। महिलाओं के लिए आरक्षण से नई रणनीतियां बनीं।
मतगणना से पहले सस्पेंस चरम पर। यह नतीजे न सिर्फ बीएमसी, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति बदल सकते हैं। मुंबईवासी अपनी किस्मत खुद तय करेंगे।