बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने शेख हसीना और उनके सहयोगी असदुज्जमां खान कमाल की सजा को उम्रकैद से फांसी में तब्दील करने की मांग पर 20 जनवरी को सुनवाई तय की है। अपीलेट डिवीजन ने आईसीटी अभियोजन की याचिका स्वीकार कर यह तारीख मुकर्रर की।
जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े केस में यह अपील दाखिल हुई। 17 नवंबर के फैसले में एक आरोप पर मौत और दूसरे पर आजीवन कारावास दिया गया था। अभियोजक ने उम्रकैद को मौत में बदलने के लिए आठ आधार दिए हैं।
जस्टिस एमडी रेजाउल हक ने चैंबर में गुरुवार को आदेश दिया। मामला कॉज लिस्ट के आइटम 58 पर था। गाजी एमएच तममी ने मीडिया को बताया कि अपराधों की गंभीरता को देखते हुए फांसी जरूरी है। उन्होंने समयबद्ध अपील पर भरोसा जताया।
यह विकास हसीना के हटने के बाद बांग्लादेश में चल रही न्याय प्रक्रिया को रेखांकित करता है। जनता में जवाबदेही की भावना मजबूत है। 20 जनवरी की सुनवाई से कई अन्य मामलों पर असर पड़ सकता है, जो अंतरिम सरकार के एजेंडे को मजबूत करेगी।