पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक रैली में अपनी अदम्य इच्छाशक्ति की मिसाल पेश की। उन्होंने कहा, ‘पांव के छाले भी मेरी राह न रोक सके, जिंदगी भर दुआओं के दम पर चली।’ ये पंक्तियां उनकी राजनीतिक यात्रा की सच्चाई को उजागर करती हैं।
1980 के दशक से सक्रिय राजे ने ग्रामीण इलाकों में पैदल भ्रमण कर जनता का दिल जीता। मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन क्षेत्र में क्रांति लाई। बावजूद चुनौतियों के, वे कभी रुकी नहीं।
भाजपा की एकजुटता पर जोर देते हुए ये भाषण महत्वपूर्ण है। आंतरिक कलह के बीच राजे कार्यकर्ताओं को एकजुट करने में जुटी हैं। आस्था ने उन्हें हर मुश्किल से उबारा।
राजस्थानवासियों के लिए ये प्रेरणा स्रोत है। सियासत के रेगिस्तान में राजे की चलने की कला सबको सिखा रही है। भविष्य की राजनीति में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।