ओस्लो से बड़ी खबर: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिका के ग्रीनलैंड पर दांव को सिरे से खारिज किया। गुरुवार को उन्होंने बताया कि वॉशिंगटन की हालिया चर्चा में कोई प्रगति नहीं हुई और अमेरिका की अधिग्रहण इच्छा जस की तस है।
बुधवार को उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के बाद फ्रेडरिक्सन ने कहा, ‘बैठक कठिन थी। हमारे मंत्रियों ने डेनमार्क के रुख को साफ-साफ रखा।’ कार्य समूह बनेगा, लेकिन असहमति गहरी है।
‘ग्रीनलैंड पर अमेरिकी लालसा खत्म नहीं हुई। हम इसे कभी सफल नहीं होने देंगे,’ उन्होंने चेतावनी दी। नाटो के संदर्भ में उन्होंने इसे सामूहिक चिंता बताया। फ्रांस मैक्रों के नेतृत्व में सैन्य सहायता बढ़ा रहा है, जबकि जर्मनी, नीदरलैंड्स, स्वीडन और नॉर्वे ने दल भेजे हैं।
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते खतरे के बीच ट्रंप के बयान ने विवाद भड़काया है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है, लेकिन अमेरिकी अड्डा वहां मौजूद है। सहयोगियों का एकजुट रुख इस भू-राजनीतिक संघर्ष को नई दिशा दे रहा है।