आंध्र प्रदेश में संक्रांति के रंग में एक अनोखा रंग जुड़ गया। एक किसान के पाले मुर्गे ने मुर्गा लड़ाई में धमाल मचा दिया और 1.53 करोड़ रुपये का पुरस्कार जीत लिया। यह रिकॉर्ड जीत पूरे राज्य में सनसनी फैला रही है।
त्योहार के दौरान ग्रामीण मैदानों में मुर्गा लड़ाई का आयोजन आम है। खिलाड़ी मुर्गों को विशेष आहार, व्यायाम और देखभाल देकर तैयार करते हैं। इस इवेंट में 100 से अधिक प्रतिभागी थे, जहां दांवों की राशि करोड़ों में पहुंच गई।
विजयी मुर्गा ने अपनी फुर्ती और हमलों से सभी को प्रभावित किया। अंतिम बाउट में उसने प्रतिद्वंद्वी को पलक झपकते हराया। भीड़ के जयकारों के बीच पुरस्कार वितरण हुआ, जो क्षेत्र की सबसे बड़ी रकम है।
कानूनी तौर पर यह खेल विवादास्पद है। पशु अधिकार संगठन क्रूरता का आरोप लगाते हैं, वहीं समर्थक इसे सांस्कृतिक धरोहर मानते हैं। पुलिस कभी-कभी हस्तक्षेप करती है, लेकिन पर्व के समय ढील बरती जाती है।
जीतने वाले व्यक्ति ने कहा कि यह पैसा खेती, शिक्षा और घर बनाने में लगेगा। यह कहानी प्रेरणा देती है कि मेहनत और भाग्य से कुछ भी संभव है। संक्रांति की खुशियां अब और भी चमक उठी हैं।